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बागवट जी कहते हैं त्रिफला के चमत्कार है असरदार। (Magial Benefits of Triphala Churna in हिंदीI)

त्रिफला शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘तीन फल’।ले‍किन आयुर्वेद का त्रिफला 3 ऐसे फलों का मिलन है जो तीनों ही अमृतीय गुणों से भरपूर है।


बागवट जी कहते हैं कि वात नाशक  कफ नाशक और पित्त नाशक ऐसी चीजें दुनिया में एक साथ मिले बहुत रेर वह कहते हैं कि बहुत चीजें दुनिया में है कोई वात का नाश करेगा कोई पित्त का तो कोई कफ का लेकिन कोई ऐसी चीजें भी अपनी रसोई में जो तीनों को नष्ट कर सकते हैं उनमें से नंबर एक है आमला फिर दूसरा है हरडे और तीसरा है बहेड़ा अब तीनों मिलाकर बनता है त्रिफला।

यह जो त्रिफला है ना बागवटजी इसकी इतनी बढ़ाई करते हैं इतनी प्रशंसा उन्होंने लिखी है कि खाली त्रिफला पर ही उनके 120 से ज्यादा सूत्र है। अकेले त्रिफला पर, त्रिफला कोई इसके साथ खाओ त्रिफला कोई इसके साथ खाओ त्रिफला कोई इसके साथ खाओ, इससे ज्यादा सूत्र है अकेले त्रिफला के ऊपर मतलब कि इसका जो महत्व है वह बागवट जी ने बड़े अच्छे तरीके से हमको समझाया है।

और वह कहते हैं कि यह जो यह त्रिफला है सबसे अच्छा फल आमला फिर बहेड़ा फिर हरडे  सबसे दुनिया की अद्भुत चीज है. लेकिन इसकी मात्रा के बारे में उन्होंने जो कहा है वह ध्यान रखें ज्यादा तर लोग त्रिफला इस्तेमाल करते बहुत अच्छा है  लेकिन मात्रा ध्यान रखिए हम क्या करते हैं कि हरडे, बहेड़ा और आंवला तीनों बराबर मात्रा में मिलाकर त्रिफला बनाते हैं वह कहते हैं कि यह उतना उपयोगी नहीं है। 

और हमने करके भी देखा वह कहते हैं कि त्रिफला तब अच्छा होता है की एक दो तीन  के अनुपात में  ले,
100, 200 और 300 ग्राम की मात्रा में आप जो त्रिफला चूर्ण तैयार करेंगे।

अनुपात को नोट करें

  • पहला है हरडे – 100 ग्राम।
  • दूसरा है बहेड़ा –  200 ग्राम।
  • और तीसरा है आंवला – 300 ग्राम।

त्रिफला बनाना है तो हरडे लेना है 100 ग्राम, बहेड़ा लेना 200 ग्राम और तीसरा आंवला लेना है 300 ग्राम। तो यह 100, 200 और 300 ग्राम की मात्रा में आप जो त्रिफला चूर्ण तैयार करेंगे. और यह 100, 200 और 300 ग्राम की मात्रा में त्रिफला चूर्ण तैयार करते हैं तो यह अद्भुत है ऐसा भागवत जी कहते हैं.

और यह वात, पित्त, कफ तीनों का नाश करता है। वात, पित्त, कफ तीनों से आप ग्रसित है,  तो आप त्रिफला चूर्ण मैंने बताई तरकीब से लेना शुरू करें  ऐसा भागवत जी कहते हैं।

भागवत जी ने त्रिफला लेने के नियम बताएं हैं जो मैं आपको बताने वाला हूं। रात को लेना है और सवेरे लेना है। सवेरे को त्रिफला लेने के नियम: सवेरे, सवेरे अगर त्रिफला खाएआए तो गुड़ के साथ. नहीं तो शहद के साथ, गुड़ या शहद, जैन है तो गुड़ अजैन है तो शहद। रात को त्रिफला लेने के नियम: रात का त्रिफला दूध के साथ खाएं, या गर्म पानी के साथ। त्रिफला एक ही है ना पर सवेरे त्रिफला खाया और रात को त्रिफला खाए दोनों के गुण  अलग-अलग है, दोनों की असर हमारे शरीर पर अलग-अलग होती है.  ऐसा भागवत जी का कहना है कि  असर अलग अलग है दोनों की।

 रात को यह त्रिफला आप खाएंगे दूध के साथ या गर्म पानी के साथ तो यह रेचक है, भागवत जी ने इस शब्द का यूज किया है, रेचक माने शरीर को साफ करने वाला. आत की सफाई करने वाला, पेट की सभी आंतों की सफाई करने वाला कचरे को साफ करने वाला उसको रेचक बोलते हैं. तो फिर रात को त्रिफला आप लेते हो दूध के साथ या गर्म पानी के साथ तो यह रेचक का काम करता है मतलब के लिए एक ही काम करेगा आपकी  कब्जियत को खत्म कर देगा, कितनी भी पुरानी कब्जियत है यह मिटा देगा 40 साल पुरानी अगर कब्जियत है तो उसको भी खत्म कर देगा. 

और जो दिन को त्रिफला खाया गुड़ के साथ और शहद के साथ तो वह कहते हैं यह पोषक है. एक शब्द है रेचक और एक शब्द है पोशाक पोशाक माने शरीर को जो कुछ चाहिए विटामिन सी चाहिए विटामिन डी चाहिए विटामिन B12 चाहिए  या हमें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स चाहिए शरीर को कैल्शियम चाहिए आयरन चाहिए वगैरा-वगैरा पोषक ता चाहिए तो त्रिफला सवेरे खाना ऐसा भागवत जी कहते हैं।

दोनों अलग-अलग तरीके के त्रिफला में परिणाम अलग सामने आते हैं. और जो कहते हैं हम तो  स्वस्थ हैं जी तो उनको त्रिफला सवेरे को खाना चाहिए. सम मात्रा का त्रिफला बहुत रेयर केस में यूज होता है।

त्रिफला के गुण को समझने के लिए मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं बहुत ही सरल  है रेडिएशन की बीमारी आप सभी ने सुनी  होगी और आपको यह भी पता होगा कि रेडिएशन का कोई भी इलाज इस दुनिया में अवेलेबल है एलोपैथी में रेडिएशन की बीमारी में शरीर चारों ओर से सड़ जाता है जगह जगह घाव हो जाते हैं और खून निकलने लगता है  पश भी हो जाता है।उन्होंने इलाज करवाने के लिए अलग-अलग जगह पर घूमे अमेरिका, लंदन, न्यूयॉर्क पर उनको कहीं पर भी कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई वह कपड़े भी नहीं पहन सकते थे इतनी खराब हालत हो गई थी उनको नंगे बदन रहना पड़ता था।
फिर उनकी मुलाकात राजीव दीक्षित जी से हुई और उन्होंने उन्हें होम्योपैथिक के बारे में जानकारी दी परंतु उन्होंने होम्योपैथिक के लिए मना कर दिया तब राजीव दीक्षित जीने उनको त्रिफला चूर्ण लेने की सलाह दी और कहा 1,2,3 की मात्रा में नियमित रूप से आप लेना शुरू करो अभी।

उन्होंने त्रिफला लेना स्टार्ट कर दिया पहले तीन चार महीने में रिजल्ट थोड़ा आया बहुत थोड़ा, फिर मैंने कहा मात्रा बदल के देखते हैं फिर उन्होंने  सम मात्रा की सम मात्रा माने जितना आंवला उतना ही बहेड़ा उतना ही हरडे, अब स्थिति यह है कि वह बिल्कुल सही है एक साल हो चुका है त्रिफला चूर्ण खाकर उनकी रेडिएशन की बीमारी त्रिफला से ठीक हो चुकी है. बिल कुल ठीक है पहले से ज्यादा प्रफुल्लित हैं और पहले से ज्यादा एनर्जीटिक है।


आपको पता है रेडिएशन का दुनिया मैं कोई इलाज नहीं, आपको पता है रेडिएशन का  दुनिया मैं कोई इलाज नहीं है लेकिन त्रिफला चूर्ण के पास रेडिएशन इलाज है और यही त्रिफला चूर्ण अमेरिका में हुआ होता यूरोप में हुआ होता तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती और इसकी पैटर्न भी बन चुकी होती. और करोड़ों डॉलर की कमाई शुरू  हो जाती, हमारे यहां प्रचंड मात्रा में है हर घर में है हर गांव में है इसके लिए हमें इसकी कदर नहीं है।

आंवला, बहेड़ा  और हर डे हमारे यहां फोकट में पैदा होता है  बहुत ज्यादा पैदा होता है, आप सोचने का नजरिया बदल दीजिए प्रकृति ने इतनी मात्रा में हमें जड़ी-बूटी प्रदान की है उसकी कीमत हमें करनी चाहिए,  प्रकृति की कृपा है हमारे ऊपर इतनी तादाद में आंवला हमें प्रदान किया है आंवले का इतना उत्पादन हमारे इस देश में होता है आप जानते हैं आंवले का उपयोग चमनप्राश बनाने में करते हैं और उसकी दाम 10 गुना बढ़ा देते हैं और थोड़ा सा एडवर्टाइज में पैसा खर्च करके वही प्रोडक्ट को घर-घर तक पहुंचाया जाता है पर हमें नहीं पता है यह वही आंवला है जो इस चमनप्राश में यूज हुआ है 70 परसेंट।

यह जो चमनपरास है वह त्रिफला चूर्ण से कई गुना नीचा है,  चमनप्राश से कहीं कम खर्चे में त्रिफला बनता है फिर भी त्रिफला चमनप्राश से भी ज्यादा फायदा देता है हमारे शरीर को, अगर आप अपने शरीर को वात, पित और कफ से परेशान हैं और उसको समांतर रखना चाहते हैं तो त्रिफला का प्रयोग अभी इसी वक्त चालू कर दीजिए। आप इसका पाउडर बनाकर भी डब्बे में रख सकते हैं यह घर पर भी बन सकता है बहुत ही आसान है अब आप कहेंगे अकेला आंवला खा सकते हैं तो मैं कहूंगा हां खा सकते हैं यह भी इतना ही गुणकारी है बाकी दो जड़ी बूटियों के कंपैरिजन में।

आंवला भी वात पित्त कफ यह तीनों को समान रखने में मदद करता है और बहेड़ा हरडे भी यही काम करते हैं , इसीलिए बागवटजी कहते हैं के धरती का अमृत है आंवला हरडे और बहेड़ा धरती के सभी फलों में सबसे ताकतवर फल है वह है आंवला प्रकृति ने हमें बहुत अनमोल चीज दी है हमें इनकी वैल्यू की समझ नहीं है अफसोस हमारी संस्कृति और जड़ी बूटियों के बारे में ज्यादा समझाया नहीं जा रहा है धीरे-धीरे यह समाज एलोपैथी में रूचि ज्यादा रखने लगा है इसीलिए आज समाज में हर कोई पीड़ित है। शरीर पर मांस बढ़ा है उसको छोड़ना है वजन कम करना है चर्बी घटाने है तो उनको रात को त्रिफला खाना अति उत्तम भागवत जी ने कहा है।

 अगर किसी कारणवश आप त्रिफला नहीं खा सकते आपको त्रिफला कहीं पर नहीं मिला तो आप आंवला खा सकते हो आंवला का मुरब्बा बना कर आप आंवला खा सकते हो आंवला का अचार बनाकर आप आंवला खा सकते हो बस आपको आंवला खाना है गुण तो सभी समान ही है अब कैसे खाते हो किस तरीके से खाते हो कब खाते हो यह नियम की अरसर आपके शरीर पर दिखेगी।

आंवले के बारे में आज के जो वैज्ञानिक बताते हैं वह बताते हैं की दुनिया का सबसे अनमोल एंटी ऑक्सीडेंट आंवले में है मतलब कि यह उम्र बढ़ाता नहीं है यह साइंटिफिकली साइंटिस्टहोने साबित किया है. शरीर में हमेशा ऑक्सीडेशन चलता है और ऑक्सीडेशन में उम्र कम होती है, शरीर के हर अंग का क्षय होता है, एंटी ऑक्सीडेंट यानी लोखंड पर जो जंग लगता है वह ना लगे पानी में रहकर भी तो उसे एंटीऑक्सीडेंट कहते हैं।

वैसे ही हमारे शरीर पर भी असर होती है हमारा शरीर भी गलता है उम्र के साथ-साथ परंतु आंवले में प्रकृति ने ऐसे अनमोल एंटी ऑक्सीडेंट केमिकल दिए हैं जिसकी वजह से हमारी उम्र नहीं बढ़ती अगर रोजाना चार से पांच आंवला आप खाते हो। आपकी उम्र बढ़ानी है स्वास्थ रखनी है, जवान रहना है  शरीर के अंगो का क्षय होने से रोकना है तो आंवले से अच्छा कोई भी एंटी ऑक्सीडेशन दवाई इस दुनिया में नहीं जो प्राकृतिक रूप से कुदरत हमें देता वह भी फोकट के दाम में।

बागवटजी के त्रिफला खाने के नियम

  •  त्रिफला लगातार खाने से प्रॉब्लम हो सकती है, इसको हर 3 महीने में 1 महीने का ब्रेक देना चाहिए. क्यों त्रिफला छोड़कर खाना है.  बागवतजी ठीक कहते है, अगर  त्रिफला को छोड़-छोड़ कर नहीं  खाओगे तो शरीर को इसकी आदत लग जाती है.
  • लगातार त्रिफला खाने से इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं. ( लगातार खाने से कई बार ऐसा भी लगेगा कि शरीर में कमजोरी लगेगी)।

त्रिफला खाने की मात्रा कितनी होनी चाहिए

  •  वजन कम करने के लिए त्रिफला खाना हो तो आंवले की मात्रा ज्यादा रखें और सुबह खाए एक बड़ा चम्मच दूध के साथ या शहद के साथ।
  •  जिनको लोगों को आंतों की सफाई करनी है पेट साफ करना है उनको रात को खाना चाहिए आंवले की क्वांटिटी कम रखनी है और इसको गुड़ के साथ खाना है।
  • बागवतजी कहते हैं दूध एक ऐसी चीज है इसके साथ आंवला मिलाया जा सकता है।
  • त्रिफला दिन में दो बार कभी नहीं खाना चाहिए या तो उसको सुबह  खाए या तो रात को खाएं।
  •  बाजार में मिलने वाला त्रिफला कभी ना खरीदें क्योंकि उसके जो मात्रा होती है आंवले की एक समान होती है हमें एक समान मात्रा वाले त्रिफला की जरूरत नहीं है हमें मात्रा बदलनी है जिसमें आंवला की क्वांटिटी ज्यादा रखी है इसे आपको घर पर ही बनाना है।
  • जिन को डायबिटीज है वह गुड़ के साथ आंवला खा सकता है इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है यह साइंटिफिक टेस्ट हो चुका है।

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